पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा जिस चेहरे की हो रही है, वह हैं शुभेंदु अधिकारी। बीजेपी की बड़ी जीत के बाद अब बंगाल की सत्ता की कमान उनके हाथों में आने जा रही है। शनिवार को वह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। अगर ऐसा होता है, तो वह पश्चिम बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बन जाएंगे।
दिलचस्प बात यह है कि कभी शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी का सबसे करीबी और भरोसेमंद नेता माना जाता था। लेकिन राजनीति में रिश्ते और रास्ते कब बदल जाएं, यह कहना मुश्किल होता है। तृणमूल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाने का उनका फैसला बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के करकुली गांव में जन्मे शुभेंदु अधिकारी एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। परिवार में राजनीति का माहौल था, इसलिए शुभेंदु की दिलचस्पी भी शुरू से इसी राह में रही।
उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की। साल 1995 में कांथी नगरपालिका में पार्षद बने और यहीं से उनका सफर शुरू हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने संगठन और जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। 2006 में वह कांथी दक्षिण सीट से विधायक बने और उसी साल नगरपालिका के चेयरमैन भी चुने गए।
लेकिन असली पहचान उन्हें 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से मिली। उस समय जमीन अधिग्रहण के खिलाफ पूरा इलाका उबल रहा था। शुभेंदु अधिकारी आंदोलन का बड़ा चेहरा बनकर उभरे। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को जोड़ा और आंदोलन को नई ताकत दी। यही वह दौर था, जब बंगाल की राजनीति में उनका कद तेजी से बढ़ा।
नंदीग्राम आंदोलन की सफलता के बाद ममता बनर्जी ने उन पर बड़ा भरोसा जताया और जंगलमहल इलाके की जिम्मेदारी सौंपी। शुभेंदु अधिकारी ने वहां पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। 2009 में वह तमलुक से सांसद बने और बाद में 2016 में नंदीग्राम से विधायक चुने गए। इसके बाद ममता सरकार में उन्हें परिवहन मंत्री बनाया गया।
हालांकि, समय के साथ तृणमूल कांग्रेस में उनके और अभिषेक बनर्जी के बीच दूरियां बढ़ने लगीं। आखिरकार 19 दिसंबर 2020 को उन्होंने अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी जॉइन कर ली।
इसके बाद बंगाल की राजनीति पूरी तरह बदलती नजर आई। 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर खुद ममता बनर्जी को हराकर सबको चौंका दिया। यह जीत सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं थी, बल्कि बंगाल की राजनीति में बदलते दौर का संकेत भी मानी गई।
अब मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर एक नए अध्याय में प्रवेश करने जा रहा है। कांग्रेस से शुरुआत करने वाला यह नेता आज बंगाल में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका है।





